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उत्पत्ति
पालमपुर विज्ञान केन्द्र, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में स्थापित पहला विज्ञान केन्द्र है, जो हिमालय क्षेत्र में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह केन्द्र, हिमाचल प्रदेश राज्य शासन एवं भारत सरकार की संयुक्त प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसे संस्कृति मंत्रालय की 'विज्ञान संस्कृति प्रोत्साहन योजना' (एसपीओसीएस) के तहत राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) द्वारा मूर्तरूप प्रदान किया गया । इस केन्द्र का निर्माण लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है । इस केन्द्र की स्थापना का उद्देश्य उद्योग एवं मानव कल्याण के क्षेत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की गति के रेखांकन के साथ साथ युवाओं खास तौर पर विद्यार्थियों के मध्य वैज्ञानिक चेतना का निर्माण करना था ।
इस यात्रा का आगाज़ दिनांक 16 फरवरी, 2013 को हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह एवं तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्रीमती चंद्रेश कुमारी के करकमलों से चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के परिसर में इसकी आधारशिला के साथ हुआ था । इस केन्द्र के निर्माण की कार्ययोजना में स्थानीय भौगोलिक विशेषताओं एवं शैक्षिक ज़रूरतों का खास ख्याल रखा गया। यह केन्द्र, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) के प्रशासनिक नियंत्रण एवं उत्तर क्षेत्र मुख्यालय, राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र, दिल्ली की देखरेख में कार्यरत है ।
स्थानीय आवश्यकताओं को मद्दे नज़र रखते हुए, केन्द्र में, विषयगत दीर्घायें निर्मित की गयीं है । इन्हीं में से, “अदम्य धरा दीर्घा”, जोकि हिमालय के संवेदनशील भूगर्भीय क्षेत्र पर केंद्रित है। यहाँ इंटरैक्टिव प्रदर्शों के माध्यम से भूकंप, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को समझने का मौका मिलता है । विद्यार्थियों व युवाओं के लिए "मनोरंजक विज्ञान दीर्घा" है, जहाँ यांत्रिकी, प्रकाशिकी और विद्युत चुंबकत्व से जुड़े रोमांचक प्रयोग हाथों से करके सीखे जा सकते हैं। वहीं बाहर, हरी भरी विज्ञान वाटिका (विज्ञान वाटिका) में 30 इंटरैक्टिव प्रदर्श लगे हैं, जो आगंतुक परिवारों एवं सैलानियों पढ़ाई व मनोरंजन का अनूठा संगम है।
यह केवल मात्र एक इमारत नहीं अपितु यह सक्रियता से सीखने एवं सामाजिक जुड़ाव का एक जीवंत केन्द्र है । यहाँ एक बहु-विषयी नवप्रवर्तन केन्द्र है, जहाँ छात्र अपने विचारों को पेटेंट योग्य आविष्कारों में बदल सकते हैं। इसके इतर 3डी विज्ञान फिल्में, विज्ञान शो एवं तारामंडल तथा 130 सीटों वाला एक प्रेक्षागृह, सभागार, छात्रावास, की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं । वही दुर्गम व दूरदराज़ के ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों एवं युवाओं हेतु केन्द्र की वैस्तारिक पहल के तहत भ्रमणशील विज्ञान प्रदर्शनी और वैस्तारिक शैक्षिक कार्यक्रमों के ज़रिए विज्ञान व प्रौद्योगिकी को उनके जीवन का हिस्सा बनाया जा रहा है । पालमपुर विज्ञान केन्द्र, पालमपुर का औपचारिक उद्घाटन 14 मई, 2022 को तत्कालीन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा मामले एवं खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर के कर कमलों से हुआ । इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद श्री किशन कपूर, विधायक श्री आशीष बुटेल, महानिदेशक राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद, श्री ए.डी. चौधरी और अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थित रहे । आज पालमपुर विज्ञान केन्द्र उत्तर भारत के एक महत्वपूर्ण शैक्षिक केन्द्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है
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